Thursday, 12 October 2017

दीपावली पर दिव्य गुटिका पर मंत्र जप करें और सर्वविध सुखी हों

दीपावली पर दिव्य गुटिका पर मंत्र जप करें और सर्वविध सुखी हों
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दीपावली को महानिशा कहा जाता है ,इसे tantra जगत में अत्यधिक महत्व प्राप्त है |क्योकि इस दिन किये गए तांत्रिक प्रयोग बहुत प्रभावकारी होते हैं |यह अँधेरे पर प्रकाश का विजय भी दर्शाता है |इस रात्री प्रकाश करने का अपना महत्व है |इस दिन लक्ष्मी से सम्बंधित अनेकानेक प्रयोग होते हैं जिनसे धन -समृद्धि -सुरक्षा प्राप्त होती है |दीपावली को तांत्रिक सिद्धियाँ प्राप्त की जाती है |इस दिन नकारात्मक ऊर्जा हटाने के अनेक प्रयोग किये जाते हैं और नकारात्मक शक्तियों पर विजय से सम्बंधित अनुष्ठान भी संपन्न किये जाते हैं |इस दिन नकारात्मक शक्तियाँ प्रबल भी होती हैं |इस दिन किये जाने वाले प्रयोग पूरे वर्ष प्रभावी रहते हैं |इस रात्री कोई उल्लू से सिद्धि करता है ,तो कोई हत्थाजोड़ी को सिद्ध करता है |कोई गोमती चक्र सिद्ध करता है तो कोई कौड़ियाँ सिद्ध करता है |कोई यन्त्र सिद्ध करता है तो कोई सियार्सिंगी ,,कोई वनस्पति जड़ें सिद्ध करता है तो कोई शंख आदि सिद्ध करता है |सभी का उद्देश्य शक्ति प्राप्ति ,सिद्धि प्राप्ति अथवा धन प्राप्ति होता है |उपरोक्त अथवा इनसे सम्बंधित वस्तुएं सभी को मिल ही जाए जरुरी नहीं |सभी को सही चीजें ही मिले यह भी आवश्यक नहीं |इसलिए हम एक विकल्प प्रस्तुत कर रहे हैं ,जो आपके बहुत काम आ सकता है |उपरोक्त लगभग सभी प्रयोग यहाँ किये जा सकते हैं |
आप दिव्य गुटिका का प्रयोग दीपावली की साधना के लिए अगर करते हैं तो आपकी सभी क्षेत्रों की सफलता कई गुना बढ़ जाती है |क्योकि इस चमत्कारिक दिव्य गुटिका के मुख्य अवयव रवि पुष्य योग में निष्काषित अथवा अभिमंत्रित -प्राण प्रतिष्ठित हत्थाजोड़ी और सियार्सिंगी होते है ,जिनके साथ श्वेतार्क ,नागदौन ,महायेगेश्वरी ,एरंड ,अमरबेल ,हरसिंगार ,हाथी दांत ,गोरोचन ,पिली कौड़ी ,गोमती चक्र आदि विभिन्न २१ अद्भुत ,विशिष्ट और चमत्कारिक वनस्पतियाँ और वस्तुएं होती हैं ,जो मिलकर ऐसा अद्भुत प्रभाव उत्पन्न करते हैं की यह चमत्कारिक प्रभाव युक्त हो जाती है | यह सभी वस्तुएं विशिष्ट उच्च स्तर के साधक द्वारा विशिष्ट मुहूर्त में प्राण-प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती हैं ,जबकि उपयोग किये गए सामान भी विशिष्ट मुहूर्त में ही विशिष्ट तांत्रिक पद्धति से निष्कासित और प्राप्त किये हुए होते हैं |उपरोक्त वस्तुओं की उपयुक्त और विशिष्ट मुहूर्त में विशिष्ट तांत्रिक साधक द्वारा की गयी तांत्रिक क्रिया के बल पर यह गुटिका अति शक्तिशाली वशिकारक-आकर्षक -सुरक्षाप्रदायक ,धन-संमृद्धि प्रदायक हो जाती है |इससे निकलने वाली तरंगे साथ रखने वाले धारक के साथ साथ ही आसपास के लोगों को भी प्रभावित करती है, जिससे धारक को उपरोक्त लाभ मिलने लगते हैं |इस गुटिका की एक विशेषता है की यह आपके घर की या आपकी नकारात्मक ऊर्जा को सामने ला देती है |
इस गुटिका पर दीपावली को किये गए आपके मंत्र जप अथवा साधनाए अथवा लक्ष्मी से सम्बंधित प्रयोग आपकी सफलता को बहुत बढ़ा देते हैं और आपके प्रयोग सफल होते हैं |अलग -अलग वस्तुओं को प्राप्त करना और उनके अलग अलग प्रयोग करने की बजाय एक साथ इनका प्रयोग अनेक कार्य सिद्ध करता है
इसमें उपयोग की गयी हत्थाजोड़ी में माता चामुंडा का वास माना जाता है |इस जड़ी का सर्वाधिक प्रभाव इसकी सम्मोहंनशीलता है | साधक [व्यक्ति] इसे लेकर कही भी जाये उसका विरोध नहीं होगा |सम्बंधित मनुष्य उसके अनुकूल आचरण और व्यवहार करेगा |इस जड़ी के इसी गुण [सम्मोहनशीलता ]के कारण ही बहुत से लोग इसका प्रयोग प्रेम सम्बन्धी मामलों में भी करते हैं ,,|पति-पत्नी के मामलों में यह अत्यंत उपयोगी भी है और सदुपयोग भी |सम्मोहन और वशीकरण [आकर्षण ]के अतिरिक्त इसका प्रयोग धन वृद्धि ,सुरक्षा ,सौभाग्य वृद्धि ,व्यापार बाधा हटाने आदि में भी किया जाता है और बेहद प्रभावी भी है | इसकी सम्पूर्ण विधि पूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा इसे अमूल्य बना देती है |धारक या साधक यात्रा ,विवाद ,प्रतियोगिता ,साक्षात्कार ,द्युतक्रीडा ,और युद्धादी में यह साधक की रक्षा करके उसे विजय प्रदान करती है |भूत-प्रेत आदि वायव्य बाधाओं का उसे कोई भय नहीं रहता ,धन-संपत्ति देने में भी यह बहुत चमत्कारी सिद्ध होती है |इस पर विभिन्न प्रकार के वशीकरण-आकर्षण-सम्मोहन के प्रयोग किये जाते हैं ,विदेश यात्रा की रुकावटें दूर करने की क्रियाएं होती हैं ,घर की सुरक्षा की क्रियाएं होती हैं ,धन-संपत्ति-आकस्मिक लाभ सम्बन्धी क्रियाएं होती हैं ,व्यापार वृद्धि प्रयोग होते हैं ,मुकदमे में विजय ,विरोधियों की पराजय की क्रियाएं होती है ,,इसे जेब में रखा जाये तो सम्मान-सम्मोहंशीलता-प्रभाव बढ़ता है ,सामने के व्यक्ति का वाकस्तम्भन होता है ,आकस्मिक आय के स्रोत बनते हैं
दूसरी वस्तु सियार्सिंगी शत्रु पराभव ,सामाजिक सम्मान ,शरीर रक्षा ,श्री समृद्धि ,आकर्षण ,वशीकरण ,सम्मोहन ,धन-सम्पदा ,सुख शान्ति के लिए उपयोग की जा सकती है |किसी शुभ तांत्रिक मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित सियारसिंगी वाद-विवाद ,युद्ध ,संकट ,आपदा ,से बचानेवाला भी सिद्ध होता है |यह रक्षा कार्यों में अद्भुत सफलतादायक कहा जाता है |इसे धारण करनेवाला व्यक्ति दुर्घटना ,विवाद ,युद्ध अथवा किसी अन्य संकट में पड़ने पर तुरंत ही आप्दामुक्त हो जाता है |इस पर धन-समृद्धि ,वशीकरण ,सम्मोहन ,सुरक्षा से सम्बंधित विभिन्न क्रियाएं भी होती हैं ,जैसी आवश्यकता हो |केवल मंत्र और पद्धति ही बदलती है सियारसिंगी वही रहता है |इसे रखने वाला व्यक्ति जहाँ भी जाता है वहां का वातावरण उसके अनुकूल हो जाता है | इसी प्रकार इस गुटिका में शामिल २१ वस्तुओं में से हर वस्तु का अपना एक अलग और विशिष्ट बहुआयामी प्रभाव है |इनके बारे में लिखने पर कई पोस्ट कम हो जायेंगे |वैसे भी यह हमारे गोपनीय खोज हैं अतः सभी वस्तुओं और उनके प्रभावों के बारे में बता पाना भी संभव नहीं |
इस गुटिका/डिब्बी के उपयोग से धन वृद्धि ,सम्मोहन ,वशीकरण ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा ,शत्रुओं से सुरक्षा ,अभिचार कर्म से सुरक्षा ,संपत्ति संवर्धन ,यात्रा में सुरक्षा ,विवाद-प्रतियोगिता में सफ़लता ,साक्षात्कार में सफ़लता ,द्युतक्रीडा -शेयर -सट्टा -लाटरी -कमोडिटी के कार्यों में सफलता ,शत्रु से अथवा मुकदमे में विजय ,अधिकारी का अनुकूलन -वशीकरण ,गृह दोष-वास्तु दोष का शमन ,गृह कलह का शमन ,ग्रह बाधा-अशुभत की समाप्ति ,प्रियजनों का अनुकूलन-वशीकरण किया जा सकता है |इसके अतिरिक्त भी यह गुटिका के अनेकानेक और विशिष्ट उपयोग हैं ,जिनके लिए विविध प्रकार की क्रियाएं की जा सकती है ,इसकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है ,उद्देश्य के अनुसार भिन्न क्रियाएं विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण कर सकती हैं |यह गुटिका हमारे वर्षों के tantra क्षेत्र में शोध का परिणाम है और इसके परिणाम अनुभूत हैं |

इस डिब्बी के उद्देश्य विशेष के साथ प्रयोग भी विशिष्ट हो जाते हैं |लक्ष्मी प्राप्ति हेतु इस पर लक्ष्मी या कमला के मंत्र जप किये जा सकते है |अभिचार या तांत्रिक बाधा हटाने के लिए इस पर काली ,तारा ,बगला ,दुर्गा के मंत्र किये जा सकते हैं |किसी कार्य में आ रही बाधा हटाने के लिए इस पर भैरव ,हनुमान आदि के मन्त्र किये जा सकते हैं | यह शेयर ,सट्टा ,लाटरी ,कमोडिटी ,मार्केटिंग ,सेल्स से जुड़े लोगों को स्वाभाविक लाभ देती है क्योकि इसमें आकस्मिक आय प्रदान करने में सहयोगी tantra वस्तुएं है जो आकर्षण शक्ति बढ़ाने के साथ आय बढाती हैं |नकारात्मक ऊर्जा हटाने के लिए इसपर काली ,चामुंडा ,दुर्गा के मंत्र विशिष्ट प्रभाव उत्पन्न करते हैं |यह अभिचार हटाने और उसका प्रभाव कम करने का काम करती है |भूत-प्रेत ,वायव्य बाधाओं को इससे कष्ट होता है और काली ,दुर्गा के मंत्र से उनकी शक्ति कम होती है |गणपति मंत्र करने से सुख -समृद्धि प्राप्त होती है |आकर्षण ,वशीकरण मंत्र का जप करने से आकर्षण प्रभाव उत्पन्न होता है |ग्रहण में मंत्र इस पर जपने से इसका प्रभाव और मंत्र का प्रभाव दोनों बढ़ते हैं |........................................................................हर-हर महादेव 

विशेष - किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें -मो. 07408987716 ,समय -सायंकाल 5 से 7 बजे के बीच . 

दीपावली पर महालक्ष्मी प्रयोग

दीपावली पर महालक्ष्मी प्रयोग
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दीपावली पर महालक्ष्मी का विशेष महत्त्व है |इस दिन इनकी पूजा से माना जाता है की वर्ष भर सुख समृद्धि प्राप्त होती है |इस दिन अनेक मन्त्र सिद्ध किये जाते हैं ,यन्त्र बनाये जाते हैं ,तांत्रिक सिद्धियाँ की जाती हैं |यह महानिशा तांत्रिक प्रयोगों और नकारात्मकता हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है |जो तांत्रिक विधियाँ जानते हैं उनके लिए तो महानिशा की साधना आसान होती है ,पर सामान्य लोग इससे कैसे अधिकतम लाभ उठायें ,इस हेतु हम एक विशिष्ट प्रयोग प्रस्तुत कर रहे हैं |हमारे द्वारा अपने इच्छुक लोगों को पूर्व में जो दिव्य गुटिकाये /डिबिया भेजी गई हैं उस पर यह प्रयोग अत्यधिक प्रभावकारी होगा |अतः दिव्य गुटिका धारक दीपावली के दिन उस पर यह प्रयोग कर अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें इसलिए हम यह प्रयोग लिख रहे हैं ,क्योकि जिन्हें भी हमने गुतिकाएं भेजी हैं उनके प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी होती है की हम उन्हें समय समय पर उससे सम्बंधित विशेष विभिन्न प्रयोग बताएं जिससे वह अधिकतम लाभ प्राप्त कर सुखी हो सकें |दीपावली बाद अगले क्रमों में हम दिव्य गुटिका पर नकारात्मक ऊर्जा हटाने ,आकर्षण सिद्धि ,वशीकरण सिद्धि ,व्यापार बाधा निवारक प्रयोग ,आकाश्मिक -आय -व्यवसाय वर्धक प्रयोग ,आजीविका प्राप्ति प्रयोग ,विदेश गमन बाधा निवारक प्रयोग आदि क्रमशः प्रस्तुत करेंगे ,जिससे हमारे दिव्य गुटिका धारक एक ही चमत्कारी डिब्बी से अनेक प्रयोग कर अपनी मनोकामना पूर्ण कर सकें |
प्रयोग
--------- दीपावली की रात्री शुद्ध स्वच्छ होकर उपयुक्त मुहूर्त में पूजा स्थल पर बैठें |अपने सामने जो भी आपके पहले से लक्ष्मी गणेश हों अथवा जो भी पूजा करनी हो जिसकी भी उन सबको अपने सामने बाजोट या चौकी पर लाल अथवा पीला कपडा बिछाकर रखे |कपडे पर कुमकुम से अथवा सिन्दूर से अष्टदल कमल का निर्माण मध्य में कर उस पर दिव्य गुटिका स्थापित करें |जिनके पास दिव्य गुटिका न हो वे लक्ष्मी जी को ही रख सकते हैं |इस पूजन में खुद केवल एक वस्त्र धारण करें ,ठंडक महसूस हो तो अतिरिक्त ऊनि वस्त्र से खुद को ढक सकते हैं |पूजन की दिशा पश्चिम की ओर रखें |यदि जप करना आटा हो तो रुद्राक्ष अथवा स्फटिक की माला से इस समय जप करें अन्यथा केवल समय निश्चित कर ले |कम से कम दो घंटे जप करना है |
अब हाथ में जल लेकर विनियोग बोले-
ॐ अस्य श्री महालक्ष्मी मंत्रस्य ब्रह्मा ऋषि:,गायत्री छन्दः ,श्री महालक्ष्मीर्देवता ,श्रीं बीजं ,नमः शक्तिः ,सर्वेष्ट सिद्धये जपे विनियोगः |----------- हाथ का जल भूमि पर छोड़ दें |
अब अगर न्यास करना आता हो तो रिश्यादी न्यास ,कर न्यास आदि करें ,नहीं आता तो खुद में कमला महालक्ष्मी की भावना करें |  अब ध्यान करें ---
ॐ सिन्दूरारुण कान्तिमब्जवसति सौन्दर्यवारान्निधि
कोटिरांगदहारं कुंडल कटीसूत्रादिभी र्भुशिताम |
हस्ताब्जैर्वसूपत्रमब्ज युगलादशौं वहन्तीं परामावीताम
परिचारिकाभिरनिशं ध्यायेत्प्रियाँ शार्गिण:||
अब आँखें बंद कर अपने मन में लक्ष्मी जी की मूर्ती सजीव करें और धीरे धीरे उन्हें लाकर बाजोट में राखी मूर्ती और दिव्य गुटिका में क्रमशः उन्हें स्थापित करें और भावना करें की लक्ष्मी जी उनमे आकर बैठ गई हैं |
अब जितना आपको पूजन आता है उतना पूजन करें ,जैसे जल ,अक्षत ,चन्दन ,सिन्दूर ,पुष्प ,धुप ,दीप ,नैवेद्य [प्रसाद या मिष्ठान्न ],लौंग -इलायची आदि समर्पित करें |
इसके बाद आप रुद्राक्ष अथवा स्फटिक की माला से निम्न मंत्र की 11 माला जप करें ,अगर माला करना नहीं आता तो आप २ घंटे तक जप करें |
मंत्र -
-------- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ||
जप पूर्ण होने पर हाथ में जल लेकर देवी के बाएं हाथ में जप को समर्पित करें और अपनी सुख समृद्धि धन धान्य की कामना करें |तदुपरांत आरती करें और किसी प्रकार की गलती हेतु क्षमा प्रार्थना करें |
सुबह दिव्य गुटिका अथवा मूर्ती ,यंत्र पूजा स्थान पर स्थापित करें और अगले दिन से रोज कम से कम एक माला उपरोक्त मन्त्र की उस पर करते रहें |
विशेष

---------- उपरोक्त पूजन प्रक्रिया अति सामान्य जन हेतु है ,जो किसी प्रकार की पूजा पद्धति नहीं जानते ,अधिकतम लाभ उन्हें कैसे दिया जाए इस उद्देश्य के दृष्टिगत यह पद्धति बने गई है |जो साधक हैं अथवा जो जानकार हैं वह अपने जानकारी के अनुसार पूजा बढ़ा अथवा घटा सकते हैं |........................................................................हर-हर महादेव 

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नवरात्र , दीपावली में धन की लालसा

नवरात्र दीपावली और धन की लालसा
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दीपावली ,नवरात्रि की पूजा सामान्य जन में सुख -समृद्धि और धन के लिए होती है ।सभी पूजा करके सीधे धन चाहते हैं ,सभी चाहते हैं लक्ष्मी उनके घर जाएं और बैठ जाएं ।दुनियाभर के सुख और समृद्धि उन्हें मिल जाए ।इसके लिए नवरात्र दुर्गा पूजा तो दीपावली पर गणेश लक्ष्मी लाकर पूजा करते हैं ।परिणाम कुछ संदिग्ध होता है ,जिसको आने वाले साल कुछ लाभ हुआ वह गणेश ,लक्ष्मी ,दुर्गा की कृपा मान लिया ,जिसे नहीं हुआ अपने भाग्य को दोष दे लिया ,की भाग्य में ही नहीं तो लक्ष्मी गणेश कहाँ से दे देंगे ।है ना हास्यास्पद ,फिर आपकी पूजा का क्या हुआ ,उसका परिणाम कहाँ गया ।कोई नहीं सोचता
अरे भाई कुछ भी कर लो होगा वही जो भगवती चाहेगी ।मिलेगा उतना ही जितना भाग्य में होगा ।केवल भगवती के चाहने से ही भाग्य का भी पूरा मिलेगा वरना वह भी पूरा किसी को नहीं मिलता ।सब कोशिस धन के लिए करते हैं जबकि मिलता भाग्य जितना भी नहीं क्योकि भाग्य के धन को रोका जाता है नकारात्मक शक्तियों द्वारा ,फिर कितने भी उपाय करो धन के लिए नहीं मिलेगा।उपाय नकारात्मक शक्तियों के लिए करो की भाग्य का तो पूरा मिले।लक्ष्मी के पीछे भागने का कोई फायदा नहीं वो आएगी तब ना जब ये नकारात्मक शक्तियां आने देंगी और रुकावट नहीं बनेंगी ।उपाय करो इन्हें हटाने के ।सीधे लक्ष्मी को बुलाकर कोई फायदा नहीं होता ,उनका मार्ग साफ़ करना जरूरी है जिससे आपके भाग्य में उनकी जितनी मात्रा है वह सके ।रास्ता दीजिये वह तो खुद जायेगी ,सीधे बुलाइये नहीं उन्हें लाने का प्रयास कीजिये ।पूजने से वह नहीं आएगी प्रयास करने और रास्ता बनाने से वह आएगी
साधक और तांत्रिक बुद्धिमान होते हैं जो वह नवरात्र और दीपावली पर शक्ति साधना करते हैं ।वह जानते हैं मिलेगा उतना ही जितना भाग्य में होगा ,प्रयास तो भाग्य का ही पूरा मिलने का करना चाहिए।इसलिए शक्ति प्राप्त करो और नकारात्मक शक्तियों को दूर करो ,भाग्य का खुद मिल जाएगा
अधिकतर ज्योतिषी ,तांत्रिक और पंडित को खुद भाग्य का पूरा नहीं मिलता ,जबकि वह दूसरों को लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय बताते फिरते हैं ।नेट पर और किताबों में लक्ष्मी प्राप्ति के हजारों प्रयोग पड़े हैं ,कितने इनसे अमीर हो गए ।जो होते हैं अपने प्रयासों से ,भाग्य से अथवा दःह सम्बन्धी नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से मुक्त होकर

इसलिए उपाय जरूर कीजिये पर अँधेरे को ,नकारात्मकता को ,बाधाओं को हटाने के ,रास्ता साफ कीजिये लक्ष्मी के आने का ,रास्ता बनाइये उन्हें आने के लिए ।रास्ता ही नहीं होगा तो वो आएगी कहाँ से ।सीधे उन्हें बुलाकर क्या होगा ,रास्ता दीजिये वह खुद जायेगी .......( व्यक्तिगत विचार ) ...............................हर हर महादेव

विशेष - किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें -मो. 07408987716 ,समय -सायंकाल 5 से 7 बजे के बीच .